बड़ा कार्य कौन सा है

प्रेरणा पुस्तक से डॉक्टर स्वामी देवव्रत सरस्वती

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बड़ा कार्य कौन – सा है ?

बच्चों को माता – पिता और बन्धु प्राय : यही कहते हैं कि कोई बड़ा काम करो जिस से तुम्हें यश मिले और कुल- खानदान का भी नाम होवे । प्रत्येक युवा मन भी यह चाहता है कि मैं कोई विशेष कार्य करूँ परन्तु उसे उचित मार्ग दर्शन न मिलने से उसके सपने मन में ही रह जाते हैं । ऐसे युवकों के लिये कुछ सुझाव दिये जाते हैं ।

सर्व प्रथम कोई बड़ा कार्य करने के लिये अपनी क्षमताओं का विकास करना होगा तभी तो बड़े कार्य करने का साहस जुटा पायेंगे । अपनी क्षमता एवं रुचि का आकलन करना बहुत आवश्यक है । उस कार्य में लगने वाले साधन और उसकी उपयोगिता पर भी विचार कर लेना चाहिये । वेद हमारा मार्गदर्शन करते हुये कहता है

पृथक् प्रायन् प्रथमा देवहूतयोऽकृण्वत श्रवस्यानिविदुष्टरः । न ये शेकुर्यज्ञियां नावमा रुहमीर्मेव ते न्यविशन्त केपयः ।। -ऋ ० ११/४४/६

दिव्य गुणों वाले प्रथम श्रेणी के लोग अपना मार्ग अलग बनाते हैं । वे ऐसे कार्य कर जाते हैं जिन्हें सुन कर लोग दाँतों तले अंगुली दबा लेते हैं । जो इस यज्ञमयी परोपकारी नाव में चढ़ने में असमर्थ रहे वे मन्दबुद्धि किनारे ही बैठे रह गये । बड़ा कार्य करने के लिये निम्न गुण होने चाहिये

१. कार्य करने में दिव्य गुण अर्थात् विशेष प्रतिभा होनी चाहिये । परमात्मा ने सब को कुछ विशेष गुण , प्रतिभा दी है । आवश्यकता इन्हें पहचानने की है । सामान्य श्रेणी के लोग भेड़ चाल से चलने वाले होते हैं ।

लीक लीक तीनों चलें कायर कूर कपूत तीनों लीक में नहीं चलें शूरा सिंह सपूत ।

तातस्य कूपोऽयमिति ब्रुवाणा : क्षीरं जलं का पुरुषाः पिबन्ति ॥

यह कुआ मेरे बाप दादाओं ने बनवाया है यह कहते हुये खारी जल कायर पुरुष पीते हैं ।

२. वे नवीन पथ का निर्माण करते हैं । संसार में जितने भी अनुसन्धाता हुये हैं वहाँ यही देखने में आया है कि अनुसन्धाता ने परम्परा से हट कर दूसरे मार्ग की तलाश करने में अपना जीवन समर्पित किया है ।

हनुमान का लंका दहन ,

नैपोलियन बोनापार्ट का आल्पस पर्वत को लांघ कर आस्ट्रिया को विजय करना ।

एडमण्ड हिलेरी और शेरपा तेन जिंग का एवरेस्ट शिखर पर पहुंचना

ऐसे अनेक उदाहरण हैं ।

३. वे यज्ञिय नौका पर आरूढ़ होते हैं । यज्ञ का अभिप्राय जनहित की भावना , परोपकार आदि से है । जिस कार्य से बहुत लोगों का हित होता हो वह साधारण कार्य भी बड़ा होता है ।

४. ईमानदारी और लगन से किया गया कोई भी कार्य छोटा नहीं होता परन्तु उसे देश , काल , परिस्थिति के अनुसार होना चाहिये । जिस कार्य को करने का आपने निश्चय किया है उससे होने वाले लाभ तथा पूरा न होने पर उसके दुष्परिणाम पर पहले से ही विचार कर लेना चाहिये ।

बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय । बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाय ॥

५. लोग क्या कहते हैं इसकी चिन्ता न करें । संसार का यह नियम है कि जब कोई व्यक्ति परम्परा से हट कर कोई कार्य प्रारम्भ करता है तो परम्परा वादी लोग उसका उपहास करते हैं । यदि फिर भी वह अपने कार्य को आगे बढ़ाता है तो विरोध , बाधा डालना , हानि पहुंचाना आदि किया जाता है । परन्तु इस स्थिति में भी जो साहस और धैर्य से अच्छे कार्य को करता ही जाता है तो वे ही लोग उनको सम्मान देते हैं ।

६. बड़ा कार्य उसे कहते हैं जो जनता को कष्टों से मुक्ति दिलाये । जैसे किसी सार्वजनिक कार्य को आगे बढ़कर करवाना । लोगों पर बिना कारण किया जाने वाला अत्याचार , शोषण , अभाव आदि को दूर करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ने वाले के साथ दूसरे लोग भी जुड़ते चले जाते हैं ।

७. लोक में कहावत है अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता । परन्तु यह बात एक अंश में ही सत्य है । आपको स्मरण होगा कि बिहार के दशरथ माझी

ने पहाड़ को काट कर सड़क बनादी । राजस्थान के अलवर जिले में राजेन्द्र सिंह ने सूखी नदी को

सदा नीरा बना दिया । विविध क्षेत्रों में ऐसे अनेक साहस के धनी युवाओं ने उल्लेखनीय कार्य किया है और वर्तमान समय में भी कर रहे हैं जिनके इतिवृत्त समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं । उनसे प्रेरणा लेकर आप भी किसी जनहित के कार्य में जुट सकते हैं ।

सदा उत्साहित रहने के उपाय

८. यदि आप असाधारण प्रतिभा के धनी हैं तो इंजीनियरिंग टैक्नोलोजी या अन्य किसी क्षेत्र में कोई विशेष यन्त्र अथवा प्रचलित पद्धति से हट कर सस्ते , सरल और अधिक उपयोगी यन्त्र का निर्माण कर सकते हैं । अथवा कोई कार्य सरलता से किया जा सके ऐसी कार्यप्रणाली प्रस्तुत कर सकते हैं ।

९ . बड़े कार्य का कोई मापदण्ड निर्धारित नहीं किया जा सकता । कई बार उचित अवसर पर किया जाने वाला एक छोटा से कार्य भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है । आवश्यकता है निष्ठा पूर्वक उसमें लग जाने की ।

१०. पहले सार्वजनिक छोटे कार्य करने का दायित्व लें जिन्हें पूरा कर लेने से आपका अनुभव और आत्मविश्वास बढ़ जायेगा तथा दूसरे लोगों को भी यह विश्वास हो जायेगा कि आप इस बड़े कार्य को कर सकते

११. यत्ने कृते यदि न सिध्यति कोऽत्र दोषः

किसी कार्य को करने में सफलता न मिले तो छोड़ नहीं देना अपितु यह विचार करना कि पहले कार्य में कौन सी कमी रह गई थी उसका ज्ञान करके पुन : दो गुने उत्साह से कार्य को प्रारम्भ कर देना चाहिये । एक विचारक ने कहा है –

प्रारभ्यते न खलु विध्न भयेन नीचैः , प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः । विध्नैः पुनः पुनरपि प्रति हन्यमानाः ,

प्रारभ्य चोत्तम जनाः न परित्यजन्ति ॥

निम्न श्रेणी के लोग विघ्न – बाधाओं को देख कर किसी अच्छे कार्य को प्रारम्भ ही नहीं करते । द्वितीय श्रेणी के लोग वे हैं जो किसी अच्छे कार्य को प्रारम्भ तो कर देते हैं । परन्तु थोड़ी सी भी बाधा आ जाने पर उसे छोड़ देते हैं । उत्तम कोटि के लोग वे होते हैं जो किसी कार्य को प्रारम्भ करने पर चाहे कितनी ही बाधायें आयें उनका सामना करते हुयें कार्य को मध्य में छोड़ते नहीं । उसे पूरा करके ही दम लेते हैं ।

आप्नुहि श्रेयान् सममतिक्राम – समान लोगों से आगे बढ़कर श्रेय , यश कीर्ति को प्राप्त करो ।

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2 thoughts on “बड़ा कार्य कौन सा है”

  1. Rajesh kumar aary

    Aap ki shoch ved ka prachar isvar ki asli pahchan karate h and aap keshubh vichar bahut hi sundar vAmadhur h

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