जीवन में सफलता प्राप्त कैसे करें ?

(प्रेरणा पुस्तक से – डॉ. स्वामी देवव्रत सरस्वती )

जीवन में सफलता कैसे प्राप्त करें ?

सामान्य रूप में सफलता से अभिप्राय किसी लक्ष्य की प्राप्ति से है । परन्तु सफल जीवन वह है जो प्रत्येक मोर्चे पर विजयी होता हो । स्वस्थ शरीर , मानसिक सन्तुलन , उत्तम चरित्र , आर्थिक संसाधन मित्र वर्ग और समाज में मान – सम्मान वाले व्यक्ति को ही सफल जीवन वाला माना जा सकता है । सफलता के पहले सूत्र को ही यदि आचरण में लाया जाये तो अन्य कुछ करने के लिये शेष नहीं रह जाता ।

जीवनेच्छा संघशक्ति चारित्र्यं कायिकं बलम् । सदैवोद्यत भावस्य पञ्चैते जय हेतवः ।।


जीने की इच्छा ,

मिल कर रहना ,

चरित्र ,

शरीर का बल

और किसी कार्य को करने के लिये सदैव उद्यत रहना

ये पाँच जीवन में विजय दिलाने वाले होते हैं । सुनियोजित जीवन के ये पाँच आधार स्तम्भ हैं ।

२. दृढ़ इच्छा शक्ति-

व्यक्ति की सफलता में दृढ़ इच्छाशक्ति का महत्त्वपूर्ण स्थान है । व्यक्ति जैसा मन में सोचता है और उसे प्राप्त करने का दृढ़निश्चय करता है एकदिन वह उसे अवश्य ही प्राप्त कर लेगा । जैसे थोड़ी सी अग्नि शीत का निवारण करने में समर्थ नहीं होती उसी भाँति जिन की इच्छा शक्ति दुर्बल हो गई है तो जानो कि सफलता उस से कोसों दूर चली गई है ।

३. जिम्मेदारी

जिम्मेदारी और सफलता दोनों साथ चलते हैं जिम्मेदारी दी नहीं जाती अपितु ली जाती है । आपकी योग्य व्यक्ति समझ कर जो जिम्मेदारी दी है उसे एक चुनौती मानकर हृदय स्वीकार कीजिये । व्यक्ति जिम्मेदारी से ही अनुभव प्राप्त करता हुआ आगे बढ़ता है और सफलता उसके कदम चूम लेती है ।

४. कठोर परिश्रम

सफलता पैसे से खरीदने वाली वस्तु नहीं है इसके लिये दृढ इच्छाशक्ति , प्रतिबद्धता , जिम्मेदारी और कठोर परिश्रम करने की आवश्यकता होती है । आप जितना परिश्रम करोगे भाग्य उतना ही तुम्हारा साथ देगा । जो व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिये जान से जुट जाता है वह उतनी ही जल्दी सफल होता है । कठोर परिश्रम के बिना आपकी प्रतिभा और दृढ़ इच्छा शक्ति भी बेकार है ।

५. सकारात्मक दृष्टिकोण

सकारात्मक सोच का प्रभाव आपके कार्य करने की शक्ति पर पड़ता है तथा आप उस कार्य को दो गुने उत्साह से करने में लग जाते हैं । दूसरा लाभ यह होगा कि आप कुछ नया करने की सोचेंगे जिससे आपकी समझ की प्रशंसा होगी । सकारात्मक दृष्टिकोण वालों को ही आगे अवसर मिलते हैं ।

६. कुछ नया करें

साधारण श्रेणी के लोग भेड़चाल से चलने वाले होते हैं । परन्तु जो दिव्य शक्ति से सम्पन्न होते हैं वे अपना नवीन मार्ग बनाते हैं और ऐसे कार्य कर जाते हैं जिन्हें देख कर लोग दाँतों तले अंगुली दबा लेते हैं ।

थामस अल्वा एडिसन

ने बिजली का बल्ब बनाने के लिये दस हजार बार प्रयोग किये तब कहीं उन्हें सफलता प्राप्त हुई । मेडम क्यूरी दम्पती ने रेडियम की प्राप्ति के लिये भट्ठी में अपने घर का फर्नीचर भी झोकं दिया और उनको अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति हुई । नवीन उपलब्धि के लिये अपना सर्वस्व दाव पर लगाना होता है ।

७. संकटों को चुनौती दें

जवानी नाम है बलिदान का विषपान करने का । चुनौती संकटों को दे दुःखों का मान करने का ॥

यदि हम महापुरुषों के जीवन चरित्र पर दृष्टिपात करें तो पता चलेगा कि उन्होंने अशिक्षा , अत्याचार , अन्याय और अभाव को हटाने के लिये समूची व्यवस्था को ही चुनौती दी और इसके लिये आजीवन संघर्ष किया । जेलें काटीं । कोल्हू चलाये । बलिदान दिये परन्तु अन्याय के आगे झुके नहीं । कहने का अभिप्राय यही है कि सोना अग्नि में तप कर ही कुन्दन बनता है । गहरे पानी में डुबकी लगाने से ही मोती मिलते है

। किनारे पर बैठे रहने वालों को कोड़ियाँ प्राप्त होती है ।

पोत अगणित इन तरंगों ने डुबाये मानता मैं ।

पार भी पहुंचे बहुत से बात यह भी जानता मैं ॥

किन्तु होता सत्य यदि यह भी सभी जलयान डूबे ।

पार जाने की प्रतिज्ञा आज बरबस ठानता मैं

डूबता मैं किन्तु उतराता सदा व्यक्तित्व मेरा ।

हों युवक डूबे भले ही है कभी डूबा न यौवन ।

तीर पर कैसे रुकूँ मैं आज लहरों पर निमन्त्रण ॥

८. कार्य योजना बनायें-

अंग्रेजी में कहावत है- ‘ well begin is half done ‘ जिस कार्य का प्रारम्भ योजना बद्ध होकर किया जाता है उसे पूरा होने में देर नहीं लगती । यदि किसी प्रकार का व्यवधान आ भी जाये तो उसे दूर कर लिया जाता है । जिन नावों को किनारे लगने का पता है वे ही किनारे तक पहुँच पाती हैं । जो कार्य आपने प्रारम्भ किया है उसे पूरा कराने का आत्मविश्वास , आपकी क्षमता , संसाधन और मार्ग में आने वाली बाधाओं से मुकाबला करने का सामर्थ्य भी होना चाहिये । योजनाबद्ध होकर कार्य करने से आपकी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा एक ही स्थान पर केन्द्रित रहेगी तथा वह कार्य समय पर पूरा हो जायेगा ।

९ . असफलता से सीखें-

सभी कार्यों में पहली बार ही सफलता मिले इसकी गारण्टी नहीं दी जा सकती । कोई व्यक्ति दौड़ रहा है और मार्ग में गड्ढा आ जाने से गिर पड़ता है । बुद्धिमानी इसी में हैं कि वह उठ खड़ा हो और पूरी सावधानी के साथ दौड़े जिससे आगे आने वालें गड्ढ़ों से सुरक्षित रहे । एक वैज्ञानिक किन पेड़ पौधों से पैट्रोल प्राप्त हो सकता है इसका अनुसन्धान कर रहा था । हजारों वनस्पतियों में जब पैट्रोल उपलब्ध नहीं हो पाया तो साथियों ने कहा इस योजना को छोड़ दिया जाये । परन्तु उसने कहा कि मेरी खोजबीन से इतना तो ज्ञान हो गया कि इनमें पैट्रोल नहीं है । कोई भी असफलता हमें सावधान होकर कार्य करने की प्रेरणा देती है । कई बार ऐसे भी प्रसंग आये हैं । जब लक्ष्य दो कदम ही आगे और उसे प्राप्त करने का विचार छोड़ दिया गया । इसलिये असफलता भी सफलता को प्राप्त करने का एक प्रयास ही मानना चाहिये ।

१०. सदा तैयार रहना

जो पहले श्लोक में कहा गया- ‘ सदैवोद्यत भाव ‘ इसका अर्थ यह है कि किसी कार्य के करने के लिये सदा तैयार रहना । ‘ जीवन्नरो भद्र शतानि पश्येत् ‘ व्यक्ति के जीवन में अनेक सुअवसर आते हैं । परन्तु जो उनके लिये तैयार रहता है वह ही उन से लाभ उठा सकता है । एक चित्रकार ने समय का चित्र बनाया जिसके बाल मुख पर फैले हुये थे और पीछे से गंजा था । उसके दो पंख लगे हुये थे । पूछने पर उसने बतलाया कि यह समय का चित्र है । मुख पर बाल इसलिये हैं कि लोग इसे पहचानते ही नहीं । पंख इसलिये लगाये हैं कि यह बहुत तेजी से उड़ता है जो इसे पहचान कर आगे से पकड़ लेते हैं वे ही करोड़पति या प्रतिष्ठा को प्राप्त करते हैं । पीछे से गंजा इसलिये है कि एक बार निकल जाने पर इसे पकड़ना सम्भव नहीं है । स्मरण रखो

अभी समय है अभी नहीं कुछ भी बिगड़ा है ।

देखो अभी सुयोग तुम्हारे पास खड़ा है ।

करना हो जो कार्य उसी में शक्ति लगा दो ।

अपने पर विश्वास करो आलस्य भगा दो ।

आलस ही है करा रहा ये सभी बहाने ।

करना हो सो करो अभी कल हो क्या जाने ।।

आओ सफलता की इस सीढ़ी पर एक पैर आगे बढ़ाते हुये सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने का अभियान प्रारम्भ करें ।

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