अच्छी आदतों का विकास

आदतों में सुधार

व्यक्तित्व विकास के लिये यह आवश्यक है कि जो गलत आदतें हैं उन्हें छोड़ने और अच्छी आदतों को ग्रहण करने का प्रयत्न किया जाये ।

हम जो भी कार्य करते हैं उसका संस्कार , चित्त पर पड़ जाता है । आगे जाकर वह कार्य आदत बन कर अनायास ही होने लगता है । ये आदतें ही चरित्र का निर्माण करती हैं । कई बार छोटी – छोटी गलतियाँ ही व्यक्तित्व के विकास में बाधक बन जाती हैं । जैसे कुछ लोगों को नाखून चबाने की आदत होती है । इस गलत आदत वाले एक बच्चे की अंगुलियाँ देखी तो पता चला कि उसने अपने आधे नाखून चबा लिये थे । इसी भाँति कान या नाक में अंगुलियाँ डालना । बैठे – बैठे पैर हिलाना । जिस चटाई पर बैठे हैं उसके रेशे निकालना , जमीन कुरेदना । चलते हुये कानों में बटन लगाकर मोबाईल से गाने सुनना आदि ।कुछ आदतें जन्मजात होती हैं और कुछ गलत लोगों की संगति में रहने से लग जाती हैं । यदि समय रहते इनका सुधार कर लिया जाये तो अच्छा है । इनके परिपक्व हो जाने पर इनसे मुक्त हो पाना बहुत ही कठिन है । कई बार ये जीवन भर पीछा नहीं छोड़ती ।

*गलत आदतों को छोड़ना*

*1 . पुरानी आदतों पर ध्यान देना*

बार – बार किसी कार्य को करने पर उसकी आदत पड़ जाती है और वह कार्य स्वयं ही होने लगता है । कई बार न चाहते हुये भी अभ्यासवश हो जाता है । इससे छुटकारा पाने के लिये उस ओर निरन्तर ध्यान रखना चाहिये । जब उधर ध्यान रखेंगे तो सावधानी बनी रहेगी ।

2 . अच्छी आदत का प्रारम्भ*

यदि कोई गलत आदत पड़ गई है तो उसके स्थान पर कोई अच्छी आदत , जैसे देर से उठने पर प्रातःकाल जलदी उठ कर भ्रमण व्यायामादि के अभ्यास , को प्रारम्भ करना चाहिये ।

3 . प्रतिज्ञा* *क्रतुमयः पुरुषः*

‘ व्यक्ति अपने संकल्पों का बना होता है । वह मन में जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है । अपने संकल्प को बार – बार दोहराते रहना और अपने आपको समझाना चाहिये कि आगे से मैं इस गलत कार्य को नहीं । करूँगा ।

*4 .अच्छी संगति* – *सठ सुधरहिं सत् संगति पाई

* बुरी आदतों से छुटकारा पाने के लिये सर्वप्रथम दुर्जन लोगों की संगति को छोड़ अच्छे लोगों की संगति करनी चाहिये ।

5. प्रायश्चित्त* –

यदि अनजाने या न चाहते हुये भी कोई गलती हो जाये , तो उसे अपने गुरुजन , माता – पिता को बतायें । सबसे बड़ा रक्षक परमात्मा है । सच्चे दिल से उसके सामने भूल को स्वीकार करें और कोई व्रत नियम , उपवास आदि प्रायश्चित अथवा स्वयं दण्ड स्वीकार करें ।

अच्छी आदतों का विकास

*1 . दृढ़ संकल्प* – अच्छी आदत बनाने के लिये पहला सूत्र है दृढ़ संकल्प । जैसे मैं आज से संकल्प करता हूँ कि प्रातः जल्दी उठ जाऊँगा । रात्रि में सोते समय इस संकल्प को दोहराने से प्रातः समय पर आँखें खुल जायेंगी ।

*2 . अभ्यास* *करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान* । ‘ जैसे तिनकों की बनी कोमल रस्सी द्वारा कुयें से पानी निकालने से कठोर पत्थर पर भी निशान पड़ जाता है वैसे ही किसी अच्छे कार्य को बार – बार किया जाये तो उसका संस्कार चित्त पर पड़ जाता है और आगे जाकर वह आदत में बदल जाता है ।

*3 . सक्रिय रहना* – केवल संकल्प करने मात्र से अच्छी आदत का निर्माण नहीं होगा जब तक जो संकल्प किया है उसे कार्यरूप में न बदल दिया जाये । इसके लिये यह आवश्यक है कि आलस्य और बहानों को छोड़ सजग होकर कार्य प्रारम्भ कर देना चाहिये ।

*4 . वातावरण का परिवर्तन -* अनुचित वातावरण का परित्याग और अनुकूल का ग्रहण , अच्छे लोगों की संगति , अच्छी पुस्तकों का स्वाध्याय करने से अच्छी आदतों का विकास होगा ।

*5 . आत्म विश्वास* –

मैं अमुक कार्य को पूरी सफलता के साथ कर सकता हूँ । मुझमें असीम शक्ति एवं सामर्थ्य है । इस प्रकार का सकारात्मक चिन्तन करें ।

*क्रियात्मक अभ्यास*

1 . आप में जन्मजात कौन से गुण हैं जो सब अलग हैं और उनका आप किस प्रकार सदुपयोग करते हैं ?

2. विद्यार्थी के लक्षणों में कहे आप में कौन से लक्षण हैं और विद्या प्राप्ति में उनका आपको क्या लाभ होता है ?

3. व्यक्तित्व निर्माण में शारीरिक स्वास्थ्य का क्या महत्व हैं।

4. आप में गलत आदतें कौन सी हैं और उनसे छुटकारा पाने के लिये आपने किन उपायों का निश्चय किया

5. आप में किसी कार्य को करने का कितना आत्मविश्वास है ?

6. बेंत का झाड़ , बाढ़ आने पर भी सुरक्षित कैसे रहता है ?

7. ब्रह्मचर्य के साधन कौन से हैं ?

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